क्या वाकई में परेशान है हर कोई .......
जहाँ जाओ हर आदमी परेशान दिखता है, सडक पे सोने वाला जो प्रकृति की मार झेल रहा है, उससे लेके वह जो महलों में रहके प्रकृति को मार रहा है उस तक, हवाई जहाज में फर्राटे से उड़ने वाले से लेके, अपनी जिंदगी के झंझावतों से जूझता चींटी की तरह्ज रेंगने वाले तक, ज़िन्दगी में हर रोज नए तड़के के साथ आनंद लेने वाले से लेके भर पेट खाना न खाने की बजह से चिपक चुकी अंतड़ियों के साथ, भूक बुझाने के सपने के सहारे ज़िन्दगी से जूझने वाले तक ....
नोट-: आगे और लिखना बाकी है....
No comments:
Post a Comment